
ASN. हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिए गए फैसले के खिलाफ नागपुर जिला ग्रामीण महिला कांग्रेस प्रमुख कुंदा राऊत और उनके सहयोगियों के द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का विरोध दर्ज कराया गया. उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अंतर्गत पटियाला थाना क्षेत्र में एक 14 वर्षीय लड़की अपनी मां के साथ सड़क पर पैदल जा रही थी. लड़की चिल्लाई, जिससे वहां नागरिक इकट्ठा हो गये और तीनों युवक भाग गये. इस घटना को लेकर लड़की की मां ने थाने में धारा 376 (बलात्कार) और धारा 354-बी (कपड़े उतारना) और पाक्सो एक्ट की धारा 9/10 (गंभीर हमला) के तहत मामला दर्ज कराया और निचली अदालत में धारा 376 (बलात्कार) के तहत मामला चलाने का आदेश दिया गया. इस आदेश के विरुद्ध अभियुक्तों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपील दायर की।इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री राम मनोहर नारायण मिश्र ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया। गुप्तांगों को पकड़ना, कपड़े उतारने की कोशिश करना, मुख्य पात्र द्वारा रोका नहीं जा सकता।
- सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर पूरी तरह विचार करना चाहिए.
- ऐसे फैसले से समाज पर बुरा असर पड़ सकता है.
- अगर कोई पुरुष किसी महिला को बुरी नजर से देखता है या उसके शरीर के किसी हिस्से को बुरी नजर से छूता है तो उस पर बलात्कार का आरोप लगाया जाना चाहिए। जिसका फैसला इलाहाबाद कोर्ट के जज ने सुनाया है. वह सुप्रीम कोर्ट को इस फैसले को अमान्य कर देना चाहिए.साथ ही केंद्र सरकार अपना वकील नियुक्त कर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखे. अगर वहां कोई लोग मौजूद नहीं होते तो उस लड़की के साथ कोई अनहोनी घटना घट जाती. तो क्या लड़की के साथ बलात्कार होने के बाद ही मामला दर्ज किया जाना चाहिए ?