Nagpur में नारी शक्ति वंदन : 33% आरक्षण अधिनियम पर भाजपा का राष्ट्रव्यापी अभियान, महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

TEAM ASN. महिलाओं को राजनीति में अधिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब जन-जन तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई है। इस कानून के समर्थन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने देशभर में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का ऐलान किया है। इससे संबंधित जानकारी आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागपुर की महापौर नीता ठाकरे और प्रदेश सर चिटनवीस अर्चना डेहनकार दे रही थी.

भाजपा के अनुसार, 15 और 16 अप्रैल को देश के प्रत्येक लोकसभा क्षेत्र में पदयात्रा और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य इसे एक जन आंदोलन का रूप देना है, जिससे अधिक से अधिक महिलाएं राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभा सकें।


क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम

नारी शक्ति वंदना एक ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन है, जिसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। इस कानून में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

यह अधिनियम सितंबर 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसे भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


महिलाओं की बढ़ती भागीदारी

पिछले कुछ वर्षों में देश में महिलाओं की राजनीतिक और सामाजिक भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। चुनावों में महिलाओं की मतदान प्रतिशत लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 65.78% दर्ज किया गया, जो पुरुषों से अधिक है।

इसके बावजूद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी भी अपेक्षाकृत कम है। 1952 में लोकसभा में केवल 22 महिला सांसद थीं, जो 2024 में बढ़कर 75 हो गई हैं। वहीं राज्यसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है।


ग्राम स्तर पर महिलाओं की मजबूत भूमिका

ग्रामीण भारत में महिलाओं की भागीदारी का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वर्तमान में लगभग 14.5 लाख महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जो कुल प्रतिनिधित्व का करीब 46 प्रतिशत है।

इन क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व में जल आपूर्ति, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। यह दर्शाता है कि अवसर मिलने पर महिलाएं प्रशासन को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बना सकती हैं।


आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। मुद्रा योजना के तहत बड़ी संख्या में ऋण महिलाओं को प्रदान किए गए हैं, जिससे वे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकें।

उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार किया है। इसके अलावा, मातृत्व अवकाश को 26 सप्ताह तक बढ़ाना और मातृ मृत्यु दर में कमी जैसे कदम भी महत्वपूर्ण रहे हैं।


शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के चलते लड़कियों की शिक्षा दर में सुधार हुआ है और माध्यमिक शिक्षा में उनकी भागीदारी 80 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत करोड़ों खातों के जरिए बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में भी प्रगति देखने को मिली है। प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना और पोषण अभियान के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी आई है।


क्यों जरूरी है यह कानून

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भागीदारी बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना भी जरूरी है। नारी शक्ति वंदना अधिनियम इसी दिशा में एक ठोस कदम है, जो महिलाओं को नीति निर्माण प्रक्रिया में अधिक भूमिका देगा।


समावेशी विकास की दिशा में कदम

विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और स्वच्छता जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता मिलेगी। इससे नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनेंगी।


2047 के विकसित भारत की ओर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण को एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जब महिलाएं नेतृत्व के पदों पर आती हैं, तो विकास अधिक संतुलित और समावेशी होता है। यह अधिनियम भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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